Thursday, March 7, 2013

बस इस ख़याल से दुनिया भली -भली सी लगे
मैं जिस भी राह से गुज़रा मुझे तेरी सी लगे - डॉ अमित शुक्ल DyCMO रूद्र प्रयाग  9412957166

Friday, February 22, 2013

डॉ अमित शुक्ल का SMS   -

जो जी में आये कभी -कभी किया कीजिये 
मत जिन्दगी से जीने की रजा लीजिये 

हो हाथ में छतरी तो भी कभी - कभी 
बस बारिश में भीगने का मजा लीजिये -डॉ अमित शुक्ल 

Thursday, January 31, 2013

मार्निंग वाक-

हिंदुस्तान में मार्निंग वाक पर निकलने वाली जनसँख्या इतनी बड़ी हो चली है कि यदि यह जनसँख्या निकटवर्ती किसानों के खेतों में कुछ काम कर अपनी चर्बी घटाए तो देश का उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है .-सत्यमेव जयते 

Friday, January 11, 2013

मुक्ति से गहरा बंधन का नाता-

सोचता हूँ मुक्त हो जाऊं
चाहता हूँ रिक्त हो जाऊं
दुखों से पार
उलझनों के पार

हर जगह जहाँ जाता हूँ आवाजें ही आवाजें पाता  हूँ
कभी बाहर की आवाजों से घबराता हूँ
कभी अन्दर की आवाजों को दबाता हूँ

मैं ढलता जाता हूँ उसी तरह जिस तरह दुनिया चाहती है
दुनिया  की नज़रों में अपनी अहमियत बनाये रखने को
मैं अपने को छोड़ता जाता हूँ -मोड़ता जाता हूँ

सारी शर्तों को मानने के बाद भी आवाजें पीछा नहीं छोड़तीं
पलट कर दुनिया को जवाब देने को जी चाहता है
फिर सोचता हूँ -
इस दुनिया ने ही तो मुझे दुनिया दी
हवा,पानी, निवाले, खुशी-गम, प्यार -तकरार
इसी मिट्टी के तो हैं जिस मिट्टी से हम हैं

मिट्टी से मिट्टी का पुराना नाता है
इसलिए यह जग लुभाता है
बार -बार हर बार लौट-लौट आता है
मुक्ति से ज्यादा गहरा बंधन का  नाता है
मुक्ति से ज्यादा गहरा बंधन का  नाता है -ललित 

Wednesday, December 19, 2012

तर्क और मौन -



तर्कों की दुनिया में चुप  रहने वाले अक्सर गुनहगार साबित कर दिए जाते हैं .-सत्यमेव जयते

Sunday, November 4, 2012

लौटने का इंतज़ार-

जो पन्ने नज़रों से गुज़रे थे कभी
दुबारा  पलटे  न जा सके
मै यह सोच कर उन्हें सहेजता रहा कि  कभी वक़्त मिलेगा
 उनसे रू -बरू होने का
खुद के खोने का .
इसी ख़याल में अक्सर खो जाता हूँ
कि कल जरूर बैठूँगा उनके पास
बिखरी इबादतों को समेट  कर उन्हें खुश कर लूँगा
जिन्दगी जी लूँगा .
मैं उन तक पहुँच तो जाता हूँ पर पकड़ नहीं पाता .
रोज़ देखता हूँ आलमारियों से कोई शिकायत करता है
 पूछता है मेरे लिए वक़्त कब आएगा?
मैं जिन्दगी की तेज़ रफ़्तार में फिर से कल मिलने की बात कह के निकल जाता हूँ .
वो किताब मेरे लौटने का इंतज़ार करती है
वो जिन्दगी मेरे लौटने का ऐतबार करती है .-ललित 

Friday, November 2, 2012

जिन्दगी की गाड़ी जब -जब आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होने लगे तब-तब हल्की सी ब्रेक लगा देनी चाहिए.-सत्यमेव जयते